लंबी दूरी की मेरी पहली सफ़र है।

उपर से ये अनजान डगर है।

पर खुशी की बात ये है कि,

मेरे सामने जो बैठी है उसकि 26 उमर है,

भले ही बात ना हो रही हो ,

पर सामने वो हसीन हमसफ़र है।

लगता है ये मेरे पिछले जन्मों का करम है

जो पापा है संग उसके फिर भी उसे है घुरते,

क्योंकि हम तो बरके बेशरम है।

वो पुछ रहे है मेरा नाम और पता,

जैसे मेरे संग करना अपनी बेटी का लगन है।

किंतु उसकि बातें सुन रहा है कौन?

हम तो उसकि बेटी को देखने में मगन है।

और शायद वो भी मुझको देखने का कर रही जतन है।

और करे भी क्यों नहीं ?

आखिर हम ISM के किमती Amber रतन है।

अरे नहीं!

वो तो बीच में ही गई उतर है।

प्रेमपत्र लिखने से पहले ही,

प्यार कि कागज गई कुतर है ।

पर कोई नहीं ।

लगता है आज खुदा का मुझपे कुछ खास मेहर है।

जो अगले स्टेशन पे है बैठी,

उस कमसीन की तो अभी बाली उमर है।

अब फिर से सुरु हो गई बातों कि लहर है,

और बड़े मजे में कट रही मेरी सफ़र है।