एक समय की बात है जब first year ISM में आते थे,
JEE के रिजल्ट पर जब वो खुल कर इतराते थे,
IIT न मिलने का frustration दिखलाते थे,
‘थोडा और पढ़ लेता’ यही बात दोहराते थे.
ओपल की wings में नए दोस्त बनाते थे,
अपने जैसे और नए लोगों से घुल मिल जाते थे.
और ISM के मुर्गे , तब अपने पंख फडफडाते थे,
जब ‘Topper और Branch Change’ के फंडे उसे नज़र आते थे.
और तब मिलते थे कुछ लोग उसे, जिनसे गार्ड घबराते थे,
जो बिन बुलाये आकर सबके होश उड़ाते थे,
जो रात के ढाई बजे सोते first year जगाते थे,
जिस एक अँधेरी रात को senior ओपल में आते थे.
जिस वक़्त पूरे wing में कोहराम सा मच जाता था,
जब एक ही कॉल पर पूरा common room भर जाता था,
जब first floor की खिड़की one-way-out लगती थी,
जब senior की लात हर दरवाज़े पर पड़ती थी,
तब रात के बारह बजे मुर्गे anthem गाते थे,
जब एक अँधेरी रात को senior ओपल में आते थे.
जब formals और army-cut फैशन ट्रेंड बन जाते थे,
जब first year एक दुसरे से रूम lock करवाते थे,
जब भसड में खोये जूते बिन खोजे मिल जाते थे,
जब एक अँधेरी रात को senior ओपल में आते थे.
और कुछ दिनों में वो बड़े भाई से बन जाते थे,
और हर मुश्किल में जब वो हमें समझाते थे,
नोट्स, बुक्स और फंडे ISM के बतलाते थे,
‘Senior-junior relationship’ से ‘introduce’ कराते थे,
जितना मांगो उससे ज्यादा treat खिलाते थे,
जब वो हम juniors को अपने कॉलेज से मिलवाते थे,
जब वो हमारे अन्दर के ISMite को जगाते थे.
अब यह पुरानी बात है जब first year ISM में आते थे,
और नए मुर्गों से वो bond बन कर जाते थे,
जब हर जगह वो अपना भोकाल दिखाते थे,
हाँ अब यह पुरानी बात है, जब SIR ओपल में आते थे.













