ऐ खुदा

तु है कहाँ ?

ढुंढे ये जहा।

तेरे नाम पे वो मन्दिर मस्जिद बनवा गया।

है बढ रहा फ़ासला,

लड़ रहा ये जहाँ।

तेरे नाम का जो मजहब दिवार बनवा गया।

अब तो हर दुआ

का भी रास्ता

है अलग हु।

तेरे अर्थ का अलग – अलग मतलब निकाल गया।

तु बस मुरत हुआ

हर दर का ।

अलग सुरत हुआ

हर धर्म का ।

हरकोई लड़े ।

कितने ही मरे ।

जो हुआ,

तेरे नाम पे हुआ ।

तेरे ही नाम को बदनाम करा गया।

तु टोके ,

सबको रोको।

ये जहाँ

का रखवाला

तेरे नाम के आगे है लगा ।

तु कुछ करा।

इनको समझा ।

ये जहाँ

वो ना रहा

तुने जैसा था

बना रखा ।

तेरे नाम का ही अब है सहारा,

ऐ प्रभु,

ऐ खुदा ।

तु है कहाँ ?