जो दो रुपये मिल जाते साब

तो बड़ी मेहर होती साब।

ज्यादा नही बस एक रोटी से ही गुजर जाती ये रात,

जो दो रुपये मिल जाते साब।

साँझ भर से माँगे है

फिर भी कोई ना देवे है।

अब तो बस आप से ही आस है।

जो मेरी बची साँस है

वो आज रात तक कुछ और देर सिहर लेगी।

कल का सवेरा होने तक

जान जिस्म में कुछ और देर कहर लेगी।

 

भूख ने पल-पल तरपाया है।

फिर भी पेट को पानी पसंद आया है।

इतनी ठंड में पानी भी नहीं पिया जाता।

बड़ी मुश्किल से है जिया जाता।

जो ज्यादा देर हुई तो नींद फिर ना आयेगी

स्वादिष्ट खाने के सपने को पलकें फिर छू ना पायेंगी।

  बस जो दो रुपये मिल जाते साब।

               हजारों दुआएँ आप ले जाते साब।