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About Apourv Pandey

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क्या बात है!

By |February 13th, 2015|

चीखों में बदली हैं बातें संगीत बना है शोर
कुछ शांत अगर मिल जाए तो क्या बात है
जल रही है नदियाँ छूटी आंसुवों की डोर
कोई तालाब भिगा जाए तो क्या बात है
छाँव की रेत बिखरी थी कल तक अब पेड़ों की खबर नहीं
ताज़ी पत्ती कहीं दिख जाए तो क्या बात है
जल […]

अगर अँधा होता तो क्या होता?

By |September 1st, 2014|

      सोचता हूँ मैं,अगर अँधा होता तो क्या होता?
कोई दीवार ना होती,कहीं दरार ना होती
बेवजह ख़लिश से कहीं टकरार ना होती
कितनी छत है सिर के ऊपर,सच जानकार ये आँख ना रोती
एक रंग की होती शकलें,सूरत शिक़नो की मोहताज़ ना होती…

व्यंग की मुस्कान बस बातों में होती
ग़रीबी की थकान बस किताबों में होती
हरे रंग […]

असल आज़ादी…

By |August 20th, 2014|

मेरे टुकड़ों को जाने कब मेरे टुकड़े करना आ गया
जिसकी कोख में जिए जनम उसकी जान से खेलना आ गया
कल तक जिस माँ को आवाज़ दिए थकते नही थे बच्चे
आज उन्हें ना जाने कैसे उसका खून बहाना आ गया…
चीर मुझे टुकड़ों में दुश्मनी की साँसें जीते हो
रिश्ते तोड़े […]