kamalkrishna

About Kamal Krishna

This author has not yet filled in any details.
So far Kamal Krishna has created 2 blog entries.

कर कोशिश दोबारा

By |February 23rd, 2014|

कर कोशिश दोबारा
है वो अजर अमर।
पा ले उसे दोबारा।
रो मत उठ कर कोशिश दोबारा।
रोया है तु
अब हसेगा भी तु।
गिरा है तु
अब उठेगा भी तु दोबारा
रो मत उठ कर कोशिश दोबरा।
रुका था तु चलने के लिये दोबारा।
पथ बदल कर कोशिश दोबारा।
पा लेगा मंजिल तु,
रो मत उठ कर कोशिश दोबारा।

ज़िंदगी – बिना शीर्षक की एक कहानी

By |October 4th, 2013|

ज़िंदगी – बिना शीर्षक की एक कहानी
कैसी ये जिंदगानी है?
बिना शीर्षक की एक कहानी है।
मुलाकातें हुई है लोगों से ,
असमंजस की ये एक लड़ाई है।
दिल के पास किसे लाना है?
दुविधा में दिल और दिमाग की लड़ाई है।
जो भी आये है इस दिल के करीब ,
जिन्होनें भी जीता इस दिल का विश्वास है,
मुसीबत में साथ उनका […]