Nostalgia

By |August 24th, 2017|

This is Malvika Adarsh, a mollycoddled 20-year-old kid trying to paint this life of mine using the canvas of my imaginations…
I believe in bringing a change, creating a difference and bridging the gap!
I believe in equality for all even if that requires me to break the glass ceiling!!
I am different and erratic and I am […]

क्यूँकि चच्चा विधायक हैं हमारे….

By |August 24th, 2017|

पप्पुओं जैसी बातें हैं हमरी, छिछोरों जैसे अंदाज़ हैं,

खानदान की आखिरी उम्मीद हैं, जनता के लिए खाज़ हैं,

बुद्धि नाम की हर बीमारी का हम अचूक इलाज है,

हम ही यहाँ के रॉबिनहुड हैं हम ही यहाँ के सरताज है |

हमरे काँपे नाम से कांपे धरती, आसमानों में गूंजे नारे,

क्यूँकि चच्चा विधायक हैं हमारे….

 

छछुंदर जैसी शक्ल है […]

Ye jo halka halka suroor hai

By |March 2nd, 2017|

saaqii kii har nigaah pe bal khaa ke pii gayaa
lehroN se kheltaa huaa lehraa ke pii gayaa

Befuddled, by every glance of the cup bearer, I drank
Playing with the waves, the waves of ecstasy, I drank.

ai rahmat-e-tamaam merii har Khataa muaaf
maiN intihaa-e-shauq meN ghabraa ke pii gayaa

O Supreme Commander, pardon me for I […]

सपनों का सफ़र …

By |August 28th, 2016|

अक्सर ..आँखे मूँद कर सपने बुनते है हम

आँखें  खुलते  एक-एक  कर  चुनते  है  हम
कुछ  बटोर  लिया, कुछ  फ़िजूल  गए
सपनों  को  सपना  समझ  हम  भूल  गए…

हवाओं  की  गुनगुनाहट  कानों  को  छूतीं  गुजर  जा  रही  है
दुनिया  को  देखने  की  फुरसत  क्षितिज  तक  जा  कर  ठहर  जा  रही  है
हर  मौसम  हर  मंज़र  को  समेटने  में  ये  ज़िन्दगी […]

आज मैंने खिड़की से सच्चा हिंदुस्तान देखा

By |May 29th, 2016|

आज मैंने खिड़की से सच्चा हिंदुस्तान देखा
गिलहरी की फुर्ती देखी, मोर का गुमान देखा,
शांत सरोवर और मचलता तूफ़ान देखा,
गाँव देखे,खेत देखे, लहराता खलिहान देखा,
रामू देखा, डेविड देखा, गुरविंदर, रहमान देखा,
पसीने से तरबतर खेत में किसान देखा,
वहीं नंगे बदन दौड़ता, नन्हा अरमान देखा,
आज मैंने खिड़की से सच्चा हिंदुस्तान देखा.

झोपडी में रौनक देखी, सूना मकान देखा,
[…]

Black

By |February 5th, 2016|

You’ll find me in the paths,
with no direction or destination.
You’ll find me laughing all the way,
probably my tear gland is absent.

I’ll be shining from a distance,
and you’ll want to befriend me.
Gradually, you’ll fall for me,
and then one day, I’ll just leave.

I cannot stand affection,
yet that’s the thing I […]

सोच रहा था मैं …

By |February 3rd, 2016|

आँखें  सूखी  थी, मन  रोता  रहा

किस्मत  भूखी, मैं  सोता  रहा

मन  तो  उठने  को  कहता  रहा, जरूर  आलस्य  ताकतवर  होगा  

सोच  रहा  था  मैं

क्षण  दो  बाद  उठूँ, फिर  भी  पैरों  तले  ज़मीन  सिर  पे  अम्बर  होगा

आँखें   खुली  तो  देखा  एक  पहर  बीत  चुका  था 

चलना  शुरू  किया  तो  देखा  एक  शहर  बीत  चुका  था

सुबह  का […]